भारत में कृषि की स्थिरता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए पुनर्योजी खेती (रीजनरेटिव फार्मिंग) को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पद्धति में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता में सुधार, और जैव विविधता को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।
पुनर्योजी खेती के लाभ:
मिट्टी की सेहत में सुधार: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के कम उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बढ़ती है।
जल संरक्षण: मल्चिंग और कवर क्रॉप्स के उपयोग से मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे सिंचाई की आवश्यकता कम होती है।
जैव विविधता का संरक्षण: विभिन्न फसलों की खेती और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण से पर्यावरण संतुलन बना रहता है।
सरकारी प्रयास: मध्य प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए फसल विविधीकरण प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, गेहूं और धान की जगह स्थानीय जलवायु के अनुकूल और बाजार-आधारित फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन में सुधार होगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
किसानों के लिए सुझाव:
फसल विविधीकरण अपनाएं: गेहूं और धान के अलावा अन्य फसलों जैसे रागी, जौ, मोटे अनाज, कोदो-कुटकी, तिल, मसाले, औषधीय फसलों, फल और सब्जियों की खेती पर विचार करें।
प्राकृतिक खेती के तरीकों का उपयोग करें: रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक खाद और कीटनाशकों का उपयोग करें।
मिट्टी की जाँच करवाएं: मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार फसलों का चयन करें और आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति करें।
पुनर्योजी खेती अपनाकर किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण का निर्माण भी कर सकते हैं।