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बीज

बाजरा(बीज)

यदि मानसून देरी से आए या किन्हीं कारणों से समय पर बुवाई न कर सकें तो बाजरे की फसल को देरी से बोने की अपेक्षा इसकी रोपाई करना अधिक लाभप्रद पाया गया है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में पौध रोपाई के लिए लगभग 500 वर्गमीटर क्षेत्र में 2 से 3 किलोग्राम बीज उपयोग करते हुए जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में नर्सरी तैयार करनी चाहिए। पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए भली प्रकार से खेत की तैयारी करें और 12 से 15 किलोग्राम यूरिया डालें 2 से 3 सप्ताह बाद पौध की रोपाई मुख्य खेत में करनी चाहिए। जब पौधों को क्यारियों से उखाड़े तब जड़ों की क्षति कम करने के लिए ध्यान रखें कि नर्सरी में पर्याप्त नमी हो, जहां तक संभव हो रोपाई वर्षा वाले दिन करनी चाहिए। बाजरे की रोपाई करने के निम्नलिखित लाभ हैं, जैसे-

  • रोपाई विधि द्वारा बाजरा उगाने से जुलाई के तीसरे सप्ताह से अगस्त माह के प्रथम पखवाड़े तक भी रोपाई कर अच्छी पैदावार ली जा सकती है।
  • बाजरे की रोपाई वाली फसल शीघ्र पकती है एवं बाद में कम तापमान हो जाने से फसल पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
  • रोपाई वाली फसल अपेक्षाकृत भारी वर्षा का सामना अच्छी तरह से कर लेती है।
  • रोपाई के समय रोगग्रस्त कमजोर व बेमेल पौधों को पहचान कर अलग किया जा सकता है।
  • इस प्रकार सभी पौधे स्वस्थ रहेंगे तो बाजरा उत्पादन भी अधिक होगा और लाभ में वृद्धि होगी।
  • रोपाई विधि द्वारा बोई गई फसल में बढ़तवार अच्छी होती है और कल्ले व बालियों की संख्या भी अधिक होती है।

    बीज की मात्रा

    अच्छी किस्मों के लिए बिजाई के लिए 1.5 किलो प्रति एकड़ का प्रयोग करें। यदि बिजाई अच्छी तरह तैयार की ज़मीन में और एकसार की जाती है तो बिजाई की मात्रा 1 किलोग्राम तक कम हो सकती है।

    बीज उपचार

    गुंदिया रोग से बचाव के लिए बीजों को 20% नमक के घोल में पांच मिनट के लिए भिगो कर रखें पानी पर तैर रहे बीजों को निकाल दें। बाकी बीजों को साफ़ पानी के साथ धो लें।

31/03/2023 11:40:28 a.m.